सत्संग की महिम अपरम्पार
हरिओम
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No.1617 आज का गुरु संदेश 19-6-2013

सत्संग की महिम अपरम्पार है। कैसी भी विषम परिस्थितियों मे उनके संपूर्ण समाधानों के प्रशस्त पथ का एक नाम है सत्संग है। परम तत्त्व के चिंतन का नाम ही सत्संग है। सत्संग से नव-जीवन मिलता है, विचारो का शुद्धिकरण सत्संग से ही होता है। सज्जन,श्रेष्ट सतगुरु, महात्मा, ऋषि-मुनियों एवं सद्ग्रत्न्तथो के संग को भी सत्संग कहा जाता है।
गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश