मानव के कमजोर संकल्प ही उसे आत्मिक रूप से दुर्बल बना देते हैं !दुर्बल व्यक्ति कभी जीवन मैं सफलता प्राप्त नहीं कर सकता !यह दुर्बलता शरीर और मन दौनों की हो सकती है ! दौनों ही दुर्बलताएं मानव उन्नति मैं बाधक हैं !
जो मन से दुर्बल होते है वे कभी स्वयं कर्म करने का निर्णय नहीं ले पाते और जो शारारिक रूप से दुर्बल हैं वेकार्य का संकलप लेकर बगी उसे पूरा नहीं कर पाते ! यदि आप जीवन मैं पूर्ण सफल होना चाहते हैं तो अपने मन ,आत्मा और शरीर को भी शक्तिशाली बनाएं तभी आपको हर कार्य मैं सफलता मिल पाएगी !
सफलता मैं बाधक और कुछ नहीं है बलकी मनुष्य की कमी कमजोरियां या बुराइयां ही हैं !यदि अपने दुरगुनो को मिटाने का प्रयास करें तो सफलता बड़ी आसानी से मिल सकती है !
जो मन से दुर्बल होते है वे कभी स्वयं कर्म करने का निर्णय नहीं ले पाते और जो शारारिक रूप से दुर्बल हैं वेकार्य का संकलप लेकर बगी उसे पूरा नहीं कर पाते ! यदि आप जीवन मैं पूर्ण सफल होना चाहते हैं तो अपने मन ,आत्मा और शरीर को भी शक्तिशाली बनाएं तभी आपको हर कार्य मैं सफलता मिल पाएगी !
सफलता मैं बाधक और कुछ नहीं है बलकी मनुष्य की कमी कमजोरियां या बुराइयां ही हैं !यदि अपने दुरगुनो को मिटाने का प्रयास करें तो सफलता बड़ी आसानी से मिल सकती है !