हमारी जिन्दगी दो किनारों के बीच चलती हे ,कभी दुख कभी सुख ,कभी मान कभी अपमान , कभी लाभ कभी हानि ,संतुलन बना कर रहो और मन को शांत रखो !
पूज्य सुधांशुजी महाराज के प्रवचनाश
नेहा
हमारी जिन्दगी दो किनारों के बीच चलती हे ,कभी दुख कभी सुख ,कभी मान कभी अपमान , कभी लाभ कभी हानि ,संतुलन बना कर रहो और मन को शांत रखो !
पूज्य सुधांशुजी महाराज के प्रवचनाश
नेहा