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गुरुगीता (17)
संसार मैं दो तरह के लोग होते हैं ,एक हृदय से जीने वाले लोग हैं ,वे अंधे लोग हैं ,देख नहीं सकते ! दूसरे वे लोग हैं जो बुद्धी से जीते हैं ,वे लंगड़े लोग हैं ,देख सकते हैं पर दौड़ नहीं सकते !परमात्मा की समीपता ,निकटता प्राप्त करने के लिए ,हृदय भी आवयशक और बुद्धी भी , पंगु बन कर भी वहां नहीं पहुंचा जा सकता ,और अंधा व्यक्ति भी वहां नहीं पहुँच सकता , उसे नहीं छू सकता !
