WELCOME

WELCOME TO THIS BLOG KINDLY VISIT UPTO END

go upto end of this blog

please visit the above site & go upto end of this blog

AdSense Code

Popular Posts

my blogs

ब्लॉग आर्काइव

फ़ॉलोअर

always remember

I am the best, I am the winner, I can do it, Today is my day, God is always with me, Always be happy and optimist........

रविवार, 2 दिसंबर 2012

बाल्यकाल


1358
गुरु गीता (48)

बाल्यकाल:-बच्चों को ताड़ना नहीं बल्कि प्रेरणा उन्हें आगे बढाती है ! डांट के साथ साथ प्यार भी चाहिए ! कुम्हार की तरह अंदर से सहारा दे कर बाहर से चोट मारने का काम करना चाहिए ! माँ की प्रेरणा बहुत काम करती है !बच्चों को जब चाहा डांट फटकार दिया यह गलत है , क्योंकि यह ताने उलहाने उनके विकास को रोकते हैं !विद्यार्थी काल मैं बच्चों को बहुत कुछ सिखाने की जरूरत है !