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रविवार, 9 दिसंबर 2012

सतसंग स्थल -देव स्थल है


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गुरु गीता (51)

सतसंग स्थल -देव स्थल है :-सदविवेक जब जागृत होता है ,अचेतन से रिश्ता बनाने की जब जिज्ञासा होती है , तो मन सत्संग मैं जाने के लिए उतासुक होता है लालायित होता है !अंत :करण की गुहा से जब शुद्धि के भाव अंकुरित होते हैं , तो यह समझना चाहिए की प्रभु की कृपा बरस रही है और भाव शुद्धि के लिए सत्संग श्रेष्टतम स्थान है !